अमेरिका में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की हत्या – जानिए पूरी घटना

 अमेरिका में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की हत्या: वॉशिंगटन डी.सी. में यहूदी म्यूजियम के बाहर गोलीबारी की घटना


📍 घटना का विवरण

21 मई 2025 की रात वॉशिंगटन डी.सी. में स्थित कैपिटल यहूदी म्यूजियम के बाहर इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस समय हुई जब दोनों कर्मचारी म्यूजियम में आयोजित "यंग डिप्लोमैट्स रिसेप्शन" कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे। हमलावर ने उन्हें निशाना बनाकर गोलीबारी की, जिससे दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।






🧑‍⚖️ हमलावर की पहचान और गिरफ्तारी

हमलावर की पहचान 30 वर्षीय एलियास रोड्रिगेज के रूप में हुई है, जो शिकागो का निवासी है। गिरफ्तारी के दौरान उसने "फ्री, फ्री फिलिस्तीन" के नारे लगाए, जिससे यह संकेत मिलता है कि हमले के पीछे राजनीतिक या धार्मिक प्रेरणा हो सकती है।


🕵️‍♀️ जांच और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई

एफबीआई की ज्वाइंट टेररिज्म टास्क फोर्स इस घटना की जांच कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि हमलावर ने म्यूजियम के बाहर चहलकदमी की और जैसे ही पीड़ित बाहर निकले, उसने हैंडगन से गोलीबारी की। हमलावर को म्यूजियम के अंदर से गिरफ्तार किया गया। 


🗣️ अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका में यहूदी विरोधी हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घटना को "यहूदी विरोधी आतंकवादी हमला" बताया और कहा कि इजरायल इस तरह के हमलों का मुंहतोड़ जवाब देगा।

  • इजरायली राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि उन्हें अमेरिकी प्रशासन पर भरोसा है कि वे हमलावर को न्याय के कटघरे में लाएंगे।


🕯️ पीड़ितों के बारे में जानकारी

पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों इजरायली दूतावास के कर्मचारी थे और जल्द ही सगाई करने वाले थे।


🔍 पृष्ठभूमि और संभावित कारण

इस घटना को यहूदी विरोधी भावना और फिलिस्तीन समर्थक विचारधारा से प्रेरित माना जा रहा है। हाल के दिनों में गाजा में बढ़ते तनाव और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के कारण अमेरिका और अन्य देशों में यहूदी समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। 

🛡️ सुरक्षा उपाय और भविष्य की रणनीति

इस हमले के बाद अमेरिका और इजरायल दोनों ने अपने-अपने दूतावासों और यहूदी संस्थानों की सुरक्षा बढ़ा दी है। एफबीआई और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं और हमलावर के पिछले रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।


U.S.A. अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया: यहूदी-विरोधी हिंसा के खिलाफ कड़ा रुख

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिनका अब भी अमेरिका में गहरा राजनीतिक प्रभाव है, ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा:

"ये भयानक डी.सी. हत्याएं, स्पष्ट रूप से यहूदी-विरोध पर आधारित हैं और अब यह सब खत्म होना चाहिए। अमेरिका में इस तरह की घृणा और हिंसा की कोई जगह नहीं है।"

ट्रंप का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका में बढ़ती यहूदी-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ केंद्रित था, जिसे उन्होंने घृणा की संस्कृति करार दिया।


🏛️ अमेरिकी सरकार और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

घटना के तुरंत बाद अमेरिकी प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकारते हुए जांच तेज कर दी। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं:

  • विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे “राष्ट्रीय शर्म” बताते हुए जांच में इजरायली सहयोग की मांग की।

  • गृह सुरक्षा विभाग (DHS) की प्रमुख क्रिस्टी नोएम ने इस घटना को आतंकवादी हमला बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के निर्देश दिए।

  • अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने आश्वासन दिया कि "हम इस मामले को आतंकवाद की श्रेणी में रखकर कार्रवाई करेंगे और दोषियों को सजा दिलाएंगे।"

  • वाशिंगटन डी.सी. की मेयर म्यूरियल बाउसर ने इसे “यहूदी समुदाय पर सीधा हमला” बताया और घटना की निंदा की।


 इज़राइल की प्रतिक्रिया: राष्ट्रीय शोक और जवाबदेही की मांग

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को “एक यहूदी-विरोधी और आतंकवादी कृत्य” बताया और कहा कि:

"हम अमेरिका से अपील करते हैं कि वह इस हमले की पूरी जिम्मेदारी तय करे और दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाए।"

इजरायल ने सभी दूतावासों की सुरक्षा की समीक्षा शुरू कर दी है। राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग ने अमेरिका में बसे यहूदी समुदाय को भरोसा दिलाया कि इजरायल उनके साथ खड़ा है।


🌍 अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया

इस घटना की गूंज संयुक्त राष्ट्र से लेकर यूरोपीय संघ तक सुनाई दी:

  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने घटना पर “गंभीर चिंता” व्यक्त करते हुए कहा कि "अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों पर हमले किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं।"

  • यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे “सांप्रदायिक घृणा की उपज” बताया और अमेरिका से सख्त कदम उठाने की मांग की।

  • वेटिकन ने भी इस हत्या की निंदा करते हुए कहा, “धर्म और पहचान के आधार पर की गई हिंसा मानवता के खिलाफ अपराध है।”


👥 अमेरिकी जनता की प्रतिक्रिया: आक्रोश, दुख और एकजुटता

इस दुखद घटना ने अमेरिका में रह रहे यहूदी समुदाय और सामान्य नागरिकों को झकझोर कर रख दिया।

  • देशभर में विजिल (शोक सभाएं) आयोजित की गईं।

  • सोशल मीडिया पर #JusticeForEmbassyVictims, #StopAntisemitism जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

  • न्यूयॉर्क, शिकागो, लॉस एंजेलिस, मियामी जैसे शहरों में आम लोगों ने मोमबत्ती जलाकर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।

  • कई नागरिक संगठनों ने कहा कि यह हमला सिर्फ इजरायल पर नहीं बल्कि “हम सबकी साझा मानवता पर हमला” है।


📰 मीडिया की भूमिका और कवरेज

प्रमुख अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों जैसे CNN, BBC, Reuters, Al Jazeera, The New York Times ने इस घटना को प्रमुखता से कवर किया।

  • CNN ने हेडलाइन दी: "Horrific Antisemitic Attack Near Israeli Embassy in D.C."

  • The New York Times ने इस हमले को “Growing threat to Jewish diplomats in the U.S.” बताया।

  • Times of Israel और Haaretz जैसे इजरायली अखबारों ने इसे “America’s Wake-up Call” बताया।


🔒 सुरक्षा चिंताएं और भविष्य की रणनीति

घटना के बाद अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने देशभर में सभी यहूदी स्थलों, दूतावासों और संस्थानों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
साथ ही FBI ने घटना की जांच में आतंकवादी साजिश के एंगल से भी पूछताछ शुरू कर दी है।


🧩 निष्कर्ष

वॉशिंगटन डी.सी. में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की हत्या एक गंभीर और निंदनीय घटना है, जो वैश्विक स्तर पर यहूदी विरोधी हिंसा और आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं की ओर संकेत करती है। इस घटना ने अमेरिका और इजरायल दोनों को अपनी सुरक्षा नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। आशा है कि जांच एजेंसियां जल्द ही इस मामले में न्याय सुनिश्चित करेंगी और ऐसे हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।



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